हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.46.2

कांड 20 → सूक्त 46 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 46
स नः॒ पप्रिः॑ पारयाति स्व॒स्ति ना॒वा पु॑रुहू॒तः । इन्द्रो॒ विश्वा॒ अति॒ द्विषः॑ ॥ (२)
इंद्र अपनी कल्याणकारिणी नाव के द्वारा हमें पार लगाते हुए शत्रुओं से हमारी रक्षा करें. (२)
May Indra cross us through his Kalyankarini boat and protect us from enemies. (2)