हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.49.1

कांड 20 → सूक्त 49 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 49
यच्छ॒क्रा वाच॒मारु॑हन्न॒न्तरि॑क्षं सिषासथः । सं दे॒वा अ॑मद॒न्वृषा॑ ॥ (१)
हे इंद्र! जब स्तुति करने वाले विद्वान्‌ अपनी वाणी का प्रयोग करते हैं, तभी देवता उन पर प्रसन्न होते हैं. (१)
O Indra! Only when the scholars who praise use their speech, the gods are pleased with them. (1)