हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.49.2

कांड 20 → सूक्त 49 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 49
श॒क्रो वाच॒मधृ॑ष्टा॒योरु॑वाचो॒ अधृ॑ष्णुहि । मंहि॑ष्ठ॒ आ म॑द॒र्दिवि॑ ॥ (२)
वे इंद्र शिष्ट जनों के प्रति कठोर वचन न बोलें. हे अतिशय महान इंद्र! तुम अपनी ज्योति से आकाश को पूर्ण करो. (२)
They should not speak harsh words to the gentlemen. O very great Indra! Complete the sky with your light. (2)