हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 51
अ॒भि प्र वः॑ सु॒राध॑स॒मिन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे । यो ज॑रि॒तृभ्यो॑ म॒घवा॑ पुरू॒वसुः॑ स॒हस्रे॑णेव शिक्षति ॥ (१)
हे स्तोताओ! उन स्तोत्रों का उच्चारण करो जो इंद्र को मेरे समीप लाने के कारण बनें. वे इंद्र सहस्र संख्या वाला विशाल धन देते हैं. (१)
O stotao! Chant the hymns that lead to Indra's proximity to me. They give huge wealth of indra thousand numbers. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 51
श॒तानी॑केव॒ प्र जि॑गाति धृष्णु॒या ह॑न्ति वृ॒त्राणि॑ दा॒शुषे॑ । गि॒रेरि॑व॒ प्र रसा॑ अस्य पिन्विरे॒ दत्रा॑णि पुरु॒भोज॑सः ॥ (२)
हवि देने वाले जो यजमान अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर के उन का वध करते हैं, उन यजमानों के लिए इंद्र का स्वर्ण रूप धन इस प्रकार बरसता है, जिस प्रकार पर्वत से जल निकलता है. (२)
For those hosts who conquer their enemies and kill them, indra's golden form of wealth rains in such a way that water comes out of the mountain. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 51
प्र सु श्रु॒तं सु॒राध॑स॒मर्चा॑ श॒क्रम॒भिष्ट॑ये । यः सु॑न्व॒ते स्तु॑व॒ते काम्यं॒ वसु॑ स॒हस्रे॑णेव॒ मंह॑ते ॥ (३)
जो स्तोता यज्ञ में अभिषव करता है, इंद्र उसे हजार संख्या वाला धन देते हैं. हे स्तोता! तुम उन्हीं इंद्र की भलीभांति पूजा करो. (३)
Indra gives a thousand number of money to the one who performs the stota yagna. This hymn! You should worship the same Indra very well. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 51
श॒तानी॑का हे॒तयो॑ अस्य दु॒ष्टरा॒ इन्द्र॑स्य स॒मिषो॑ म॒हीः । गि॒रिर्न भु॒ज्मा म॒घव॑त्सु॑ पिन्वते॒ यदीं॑ सु॒ता अम॑न्दिषुः ॥ (४)
पापी मनुष्य इंद्र के आयुधों से बच नहीं सकते, क्योंकि इंद्र के आयुध सैकड़ों सेनाओं के समान विनाश करने वाले हैं. भोग प्रदान करने वाला पर्वत अपने पदार्थो से जिस प्रकार संपन्न बनता है, उसी प्रकार तैयार किए हुए सोमरस को पी कर इंद्र शक्ति से पूर्ण हो जाते हैं और यजमान को अन्न प्रदान करते हैं. (४)
Sinful men cannot escape from the weapons of Indra, because the weapons of Indra are as destructive as hundreds of armies. Just as the mountain that provides enjoyment becomes rich with its substances, in the same way, after drinking the prepared Somras, Indra becomes full of power and provides food to the host. (4)