हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.51.3

कांड 20 → सूक्त 51 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 51
प्र सु श्रु॒तं सु॒राध॑स॒मर्चा॑ श॒क्रम॒भिष्ट॑ये । यः सु॑न्व॒ते स्तु॑व॒ते काम्यं॒ वसु॑ स॒हस्रे॑णेव॒ मंह॑ते ॥ (३)
जो स्तोता यज्ञ में अभिषव करता है, इंद्र उसे हजार संख्या वाला धन देते हैं. हे स्तोता! तुम उन्हीं इंद्र की भलीभांति पूजा करो. (३)
Indra gives a thousand number of money to the one who performs the stota yagna. This hymn! You should worship the same Indra very well. (3)