हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.54.3

कांड 20 → सूक्त 54 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 54
ने॒मिं न॑मन्ति॒ चक्ष॑सा मे॒षं विप्रा॑ अभि॒स्वरा॑ । सु॑दी॒तयो॑ वो अ॒द्रुहो॑ऽपि॒ कर्णे॑ तर॒स्विनः॒ समृक्व॑भिः ॥ (३)
इंद्र के वज्र पर दृष्टि पड़ते ही स्तोता उन्हें प्रणाम करते हैं. हे स्तोताओ! ऋक्व नाम वाले पितरों सहित, इस वज्र की धमक तुम्हारे कानों को व्यथित न बनाए. (३)
As soon as he sees Indra's vajra, the stota bows to him. O stotao! Along with the ancestors named Rikva, the threat of this thunderbolt should not disturb your ears. (3)