हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.55.3

कांड 20 → सूक्त 55 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 55
यमि॑न्द्र दधि॒षे त्वमश्वं॒ गां भा॒गमव्य॑यम् । यज॑माने सुन्व॒ति दक्षि॑णावति॒ तस्मि॒न्तं धे॑हि॒ मा प॒णौ ॥ (३)
हे इंद्र! तुम जिस गौ, अश्व आदि को पुष्ट बनाते हो, उसे सोमरस तैयार करने वाले और दक्षिणा देने वाले यजमान को दो, पणियों के समान शत्रुओं को मत दो. (३)
O Indra! Give the cow, horse, etc. that you strengthen to the host who prepares someras and gives dakshina, do not give it to enemies like wives. (3)