हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 56
इन्द्रो॒ मदा॑य वावृधे॒ शव॑से वृत्र॒हा नृभिः॑ । तमिन्म॒हत्स्वा॒जिषू॒तेमर्भे॑ हवामहे॒ स वाजे॑षु॒ प्र नो॑ऽविषत् ॥ (१)
वृत्र असुर का वध करने वाले इंद्र को शक्ति और प्रसन्नता के लिए बड़ा किया जाता है. हम उन्हें बड़े और छोटे सभी प्रकार के युद्धों में बुलाते हैं. वे युद्ध के अवसर पर हमारे साथ मिल जाएं. (१)
Indra, who kills the Vritra Asura, is raised for strength and happiness. We call them in all kinds of wars, big and small. May they join us on the occasion of war. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 56
असि॒ हि वी॑र॒ सेन्यो॑ऽसि॒ भूरि॑ पराद॒दिः । असि॑ द॒भ्रस्य॑ चिद्वृ॒धो य॑जमानाय शिक्षसि सुन्व॒ते भूरि॑ ते॒ वसु॑ ॥ (२)
हे वीर इंद्र! तुम शत्रुओं और खंडन करने वाले दुष्टों को दंड देते हो. यज्ञ में जो तुम्हारे निमित्त सोमरस तैयार करता है उसे तुम परम ऐश्वर्य देते हो. (२)
O heroic Indra! You punish enemies and the wicked who refute. In the yajna, you give supreme opulence to the one who prepares someras for you. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 56
यदु॒दीर॑त आ॒जयो॑ धृ॒ष्णवे॑ धीयते॒ धना॑ । यु॒क्ष्वा म॑द॒च्युता॒ हरी॒ कं हनः॒ कं वसौ॑ दधो॒ऽस्माँ इ॑न्द्र॒ वसौ॑ दधः ॥ (३)
हे इंद्र! युद्ध के अवसर पर तुम डराने वाले पुरुष से धन छीनने का प्रयत्न कर रहे होओगे उस समय तुम हरे रंग वाले अथवा हरि नाम के अपने घोड़ों के द्वारा किस का वध करोगे तथा किसे धन दे कर प्रतिष्ठित करोगे? उस समय तुम अपना धन हमें प्रदान करना. (३)
O Indra! On the occasion of war, you will be trying to take away money from a man who scares you, at that time whom will you kill with your horses named Green or Hari and whom will you honor by giving money? At that time you provide your wealth to us. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 56
मदे॑मदे॒ हि नो॑ द॒दिर्यू॒था गवा॑मृजु॒क्रतुः॑ । सं गृ॑भाय पु॒रु श॒तोभ॑याह॒स्त्या वसु॑ शिशी॒हि रा॒य आ भ॑र ॥ (४)
हे इंद्र! तुम्हारा यश सरलता से सभी ओर फैल जाता है. तुम प्रसन्न हो कर हमें गाएं प्रदान करते हो. तुम हमें उत्तम धन दो. (४)
O Indra! Your fame easily spreads all over. You are happy and give us songs. You give us the best money. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 56
मा॒दय॑स्व सु॒ते सचा॒ शव॑से शूर॒ राध॑से । वि॒द्मा हि त्वा॑ पुरू॒वसु॒मुप॒ कामा॑न्त्ससृ॒ज्महेऽथा॑ नोऽवि॒ता भ॑व ॥ (५)
हे वीर इंद्र! हमारे यज्ञ में सोमरस तैयार हो जाने पर तुम प्रसन्न बनो तथा बल धारण करो. हम तुम्हें असीमित शक्ति वाला जानते हैं और तुम्हारी कामना करते हैं. तुम हमारी रक्षा करो. (५)
O Brave Indra! When the Somras is ready in our yajna, you become happy and hold strength. We know you with unlimited power and wish you. You protect us. (5)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 56
ए॒ते त॑ इन्द्र ज॒न्तवो॑ विश्वं पुष्यन्ति॒ वार्य॑म् । अ॒न्तर्हि ख्यो जना॑नाम॒र्यो वेदो॒ अदा॑शुषां॒ तेषां॑ नो॒ वेद॒ आ भ॑र ॥ (६)
हे इंद्र! हम तुम्हारी शक्ति बढ़ाते हैं. जो लोग तुम्हें हवि नहीं देते और तुम्हारी निंदा करते हैं, उन का धन छीन कर तुम हमें दो. (६)
O Indra! We increase your power. Take away the wealth of those who do not give you and condemn you and give it to us. (6)