हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.56.6

कांड 20 → सूक्त 56 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 56
ए॒ते त॑ इन्द्र ज॒न्तवो॑ विश्वं पुष्यन्ति॒ वार्य॑म् । अ॒न्तर्हि ख्यो जना॑नाम॒र्यो वेदो॒ अदा॑शुषां॒ तेषां॑ नो॒ वेद॒ आ भ॑र ॥ (६)
हे इंद्र! हम तुम्हारी शक्ति बढ़ाते हैं. जो लोग तुम्हें हवि नहीं देते और तुम्हारी निंदा करते हैं, उन का धन छीन कर तुम हमें दो. (६)
O Indra! We increase your power. Take away the wealth of those who do not give you and condemn you and give it to us. (6)