हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.57.11

कांड 20 → सूक्त 57 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 57
क ईं॑ वेद सु॒ते सचा॒ पिब॑न्तं॒ कद्वयो॑ दधे । अ॒यं यः पुरो॑ विभि॒नत्त्योज॑सा मन्दा॒नः शि॒प्र्यन्ध॑सः ॥ (११)
इसे कौन जानता है कि सोमरस निचोड़े जाने पर इंद्र कौन से अन्न को धारण करते हैं? हवि रूप अन्न से प्रसन्न हुए इंद्र अपनी शक्ति से शत्रुओं के नगरों का विनाश करते हैं. (११)
Who knows what food Indra wears when Someras is squeezed? Pleased with the food of Havi, Indra destroys the cities of enemies with his power. (11)