अथर्ववेद (कांड 20)
बट्सू॑र्य॒ श्रव॑सा म॒हाँ अ॑सि स॒त्रा दे॑व म॒हाँ अ॑सि । म॒ह्ना दे॒वाना॑मसु॒र्य: पु॒रोहि॑तो वि॒भु ज्योति॒रदा॑भ्यम् ॥ (४)
हे सूर्य! तुम स्वयं महान हो. हमारे हवि रूप अन्न से तुम्हारी महिमा की वृद्धि हो. तुम अपनी महिमा के कारण ही राक्षसों से संघर्ष करते हो. तुम व्यापक हो. कोई तुम्हारी हिंसा नहीं कर सकता. (४)
O sun! You yourself are great. May your glory increase with our food. You fight demons because of your glory. You're comprehensive. No one can do your violence. (4)