हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.65.3

कांड 20 → सूक्त 65 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 65
यस्यामि॑तानि वी॒र्या॒ न राधः॒ पर्ये॑तवे । ज्योति॒र्न विश्व॑म॒भ्यस्ति॒ दक्षि॑णा ॥ (३)
कार्य साधन के हेतु असीमित शक्ति वाले इंद्र दीप्तिमती दक्षिणा के रूप हैं. (३)
Indra Deeptimati with unlimited power for work is the form of Dakshina. (3)