हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.66.3

कांड 20 → सूक्त 66 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 66
वेत्था॒ हि निरृ॑तीनां॒ वज्र॑हस्त परि॒वृज॑म् । अह॑रहः शु॒न्ध्युः प॑रि॒पदा॑मिव ॥ (३)
हे वज्रधारी इंद्र! जिस प्रकर आदित्य अपने सहयोगियों को जानते हैं, उसी प्रकार तुम भी संतप्त करने वाले और शक्तिशाली असुरों को जानते हो. (३)
O Vajradhari Indra! Just as Aditya knows his colleagues, you also know the angry and powerful asuras. (3)