अथर्ववेद (कांड 20)
इन्द्रं॑ वो वि॒श्वत॒स्परि॒ हवा॑महे॒ जने॑भ्यः । अ॒स्माक॑मस्तु॒ केव॑लः ॥ (१६)
इंद्र का ध्यान यदि दूसरे स्तोताओं की ओर हो, तब भी हम इंद्र को बुलाते हैं. वे इंद्र हमारे ही हैं. (१६)
Even if Indra's attention is towards other hymns, we still call Indra. That Indra is ours. (16)