हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.70.18

कांड 20 → सूक्त 70 → मंत्र 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 70
नि येन॑ मुष्टिह॒त्यया॒ नि वृ॒त्रा रु॒णधा॑महै । त्वोता॑सो॒ न्यर्व॑ता ॥ (१८)
हे इंद्र! हम तुम्हारे द्वारा रक्षित हो कर घोड़ों के स्वामी बनें तथा वृत्र के समान शक्ति वाले शत्रुओं को भी नष्ट कर डालें. (१८)
O Indra! Let us be protected by you and become the masters of horses and destroy enemies with the same power as the tree. (18)