अथर्ववेद (कांड 20)
नि येन॑ मुष्टिह॒त्यया॒ नि वृ॒त्रा रु॒णधा॑महै । त्वोता॑सो॒ न्यर्व॑ता ॥ (१८)
हे इंद्र! हम तुम्हारे द्वारा रक्षित हो कर घोड़ों के स्वामी बनें तथा वृत्र के समान शक्ति वाले शत्रुओं को भी नष्ट कर डालें. (१८)
O Indra! Let us be protected by you and become the masters of horses and destroy enemies with the same power as the tree. (18)