हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.73.3

कांड 20 → सूक्त 73 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 73
प्र वो॑ म॒हे म॑हि॒वृधे॑ भरध्वं॒ प्रचे॑तसे॒ प्र सु॑म॒तिं कृ॑णुध्वम् । विशः॑ पू॒र्वीः प्र च॑रा चर्षणि॒प्राः ॥ (३)
हे यजन करने वालो! तुम अपनी हवियों के द्वारा इंद्र को प्रसन्न करो. इंद्र मनुष्यों को मन चाहे फल प्रदान करते हैं. हे इंद्र! तुम मेरे हवि रूप अन्न का सेवन करो. (३)
O you who do it! Please Indra with your lusts. Indra provides human beings with the fruits they want. O Indra! You eat food in my form. (3)