हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.77.2

कांड 20 → सूक्त 77 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 77
अव॑ स्य शू॒राध्व॑नो॒ नान्ते॒ऽस्मिन्नो॑ अ॒द्य सव॑ने म॒न्दध्यै॑ । शंसा॑त्यु॒क्थमु॒शने॑व वे॒धाश्चि॑कि॒तुषे॑ असु॒र्याय॒ मन्म॑ ॥ (२)
हे वीर इंद्र! हमारे इस यज्ञ को प्राप्त करो तथा अपना मार्ग हमारे समीप बनाओ. ये विद्वान्‌ उशना अर्थात्‌ शुक्राचार्य के समान इंद्र के हेतु उक्थ अर्थात्‌ मंत्रों के समूह का उच्चारण करते हैं. (२)
O heroic Indra! Get this yajna of ours and make your path near us. These scholars chant uktha i.e. a group of mantras for Indra like Ushna i.e. Shukracharya. (2)