हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 78
तद्वो॑ गाय सु॒ते सचा॑ पुरुहू॒ताय॒ सत्व॑ने । शं यद्गवे॒ न शा॒किने॑ ॥ (१)
हे स्तोता! सोमरस का संस्कार हो जाने पर इंद्र देव की स्तुति करो, जिस से वे हम सोमरस देने वालों के लिए गौ के समान कल्याणकारी हों. (१)
This hymn! When Someras is cremated, praise Indra Dev, so that he is as welfare as a cow for us Somaras givers. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 78
न घा॒ वसु॒र्नि य॑मते दा॒नं वाज॑स्य॒ गोम॑तः । यत्सी॒मुप॒ श्रव॒द्गिरः॑ ॥ (२)
ये इंद्र यदि हमारी स्तुतियों को सुन लेते हैं तो गौ से युक्त अन्न देने में विलंब नहीं करते. (२)
If these Indras listen to our praises, then they do not delay in giving food containing cow. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 78
कु॒वित्स॑स्य॒ प्र हि व्र॒जं गोम॑न्तं दस्यु॒हा गम॑त् । शची॑भि॒रप॑ नो वरत् ॥ (३)
हे इंद्र! तुम वृत्र राक्षस का वध करने वाले हो तथा सभी को अपरिमित अन्न देते हो. तुम गौ से सुशोभित स्थान पर आ कर हम को बल से पूर्ण बनाओ. (३)
O Indra! You are the one who kills the great demon and gives unlimited food to everyone. You come to a place adorned with cow and make us full of strength. (3)