हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.78.3

कांड 20 → सूक्त 78 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 78
कु॒वित्स॑स्य॒ प्र हि व्र॒जं गोम॑न्तं दस्यु॒हा गम॑त् । शची॑भि॒रप॑ नो वरत् ॥ (३)
हे इंद्र! तुम वृत्र राक्षस का वध करने वाले हो तथा सभी को अपरिमित अन्न देते हो. तुम गौ से सुशोभित स्थान पर आ कर हम को बल से पूर्ण बनाओ. (३)
O Indra! You are the one who kills the great demon and gives unlimited food to everyone. You come to a place adorned with cow and make us full of strength. (3)