हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.81.2

कांड 20 → सूक्त 81 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 81
आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न्विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा । अ॒स्माँ अव॑ मघव॒न्गोम॑ति व्र॒जे वज्रिं॑ चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑ ॥ (२)
हे वज्रधारी इंद्र! हमारे गोचर स्थान में अपने रक्षा साधनों के द्वारा हमारी रक्षा करो तथा अपनी महिमा से हमारी वृद्धि करो. (२)
O Vajradhari Indra! Protect us through your protective means in our transit place and increase us with your glory. (2)