यदि॑न्द्र॒ याव॑त॒स्त्वमे॒ताव॑द॒हमीशी॑य । स्तो॒तार॒मिद्दि॑धिषेय रदावसो॒ न पा॑प॒त्वाय॑ रासीय ॥ (१)
हे इंद्र! मैं तुम्हारे समान प्रभुत्व प्राप्त करूं तथा स्तुति करने वालों को धन देने वाला बनूं. पाप कर्म करने वाले धनी मुझे व्यथित न करें. (१)
O Indra! May I attain the same dominion as you and be the giver of wealth to those who praise. The rich who commit sinful deeds should not disturb me. (1)
हे इंद्र! मैं जहां से चाहूं, वहीं से धन प्राप्त कर सकूं. जो मुझ से उत्कृष्ट होना चाहे, उसे मैं स्वर्ण का दंड दूं, हे इंद्र! मुझे इस प्रकार की शक्ति देने वाला तुम्हारे अतिरिक्त दूसरा कौन रक्षक हो सकता है? (२)
O Indra! I can get money from wherever I want. Whoever wants to be superior to me, I should punish him with gold, O Indra! Who else can be the protector other than you who gives me this kind of power? (2)