हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 87
अध्व॑र्यवोऽरु॒णं दु॒ग्धमं॒शुं जु॒होत॑न वृष॒भाय॑ क्षिती॒नाम् । गौ॒राद्वेदी॑याँ अव॒पान॒मिन्द्रो॑ वि॒श्वाहेद्या॑ति सु॒तसो॑ममि॒च्छन् ॥ (१)
हे अध्वर्युजनो! इंद्र पृथ्वी पर वर्षा करने वाले हैं. उन इंद्र के लिए सोमरस के दूध रूप अंश की आहुति दो. ये इंद्र सोमरस की कामना करते हुए यज्ञ में आते हैं. (१)
O Swami! Indra is going to rain on earth. Offer a portion of the milk form of Somras to Indra. They come to the yajna wishing indra someras. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 87
यद्द॑धि॒षे प्र॒दिवि॒ चार्वन्नं॑ दि॒वेदि॑वे पी॒तिमिद॑स्य वक्षि । उ॒त हृ॒दोत मन॑सा जुषा॒ण उ॒शन्नि॑न्द्र॒ प्रस्थि॑तान्पाहि॒ सोमा॑न् ॥ (२)
हे इंद्र! तुम आकाश में उत्तम अन्न धारण करते हो तथा यज्ञ आदि के अवसर पर सोमरस का पान करते हो. तुम सोमरस की कामना करते हुए इस यज्ञ की रक्षा करो. (२)
O Indra! You wear good food in the sky and drink someras on the occasion of yajna etc. You protect this yajna while wishing for Someras. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 87
ज॑ज्ञा॒नः सोमं॒ सह॑से पपाथ॒ प्र ते॑ मा॒ता म॑हि॒मान॑मुवाच । एन्द्र॑ पप्राथो॒र्वन्तरि॑क्षं यु॒धा दे॒वेभ्यो॒ वरि॑वश्चकर्थ ॥ (३)
हे इंद्र! तुम प्रकट होते ही सोमरस की ओर जाते हो. तुम ने संग्राम में विजय प्राप्त कर के देवताओं को धन दिया. तुम विशाल अंतरिक्ष में गमन करते हो. यह अंतरिक्ष तुम्हारी कामना का बखान करता है. (३)
O Indra! You go towards Someras as soon as you appear. You conquered the battle and gave money to the gods. You travel in vast space. This space speaks of your wish. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 87
यद्यो॒धया॑ मह॒तो मन्य॑माना॒न्साक्षा॑म॒ तान्बा॒हुभिः॒ शाश॑दानान् । यद्वा॒ नृभि॒र्वृत॑ इन्द्राभि॒युध्या॒स्तं त्वया॒जिं सौ॑श्रव॒सं ज॑येम ॥ (४)
हे इंद्र देव! अहंकार से भरे हुए तथा अपनेआप को बड़ा मानते हुए शत्रुओं के साथ जब हम युद्ध करें, तब हम अपनी भुजाओं से ही हिंसक शत्रुओं को नष्ट करने में समर्थ हों. आप यदि कभी अन्न अथवा यश पाने के लिए स्वयं युद्ध करें, तब हम आपके सहयोगी बनकर विजय प्राप्त करें. (४)
O Indra Dev! When we fight with enemies full of ego and considering ourselves to be big, then we should be able to destroy violent enemies with our arms. If you ever fight for food or fame, then we will win by becoming your ally. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 87
प्रेन्द्र॑स्य वोचं प्रथ॒मा कृ॒तानि॒ प्र नूत॑ना म॒घवा॒ या च॒कार॑ । य॒देददे॑वी॒रस॑हिष्ट मा॒या अथा॑भव॒त्केव॑लः॒ सोमो॑ अस्य ॥ (५)
हे इंद्र! तुम हमारे वीरों को साथ ले कर हमारे शत्रुओं से संग्राम करो. हम तुम्हारी शक्ति से इस संग्राम में विजय प्राप्त करते हुए यशस्वी बनें. तुम अपनी जिन भुजाओं से बड़ेबड़ों से युद्ध करते हो, हम भी उन भुजाओं के समान बल से युक्त हों. (५)
O Indra! You take our heroes along and fight our enemies. Let us win this battle with your power and become successful. We should also have the same force as the arms with which you fight with the big ones. (5)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 87
तवे॒दं विश्व॑म॒भितः॑ पश॒व्यं यत्पश्य॑सि॒ चक्ष॑सा॒ सूर्य॑स्य । गवा॑मसि॒ गोप॑ति॒रेक॑ इन्द्र भक्षी॒महि॑ ते॒ प्रय॑तस्य॒ वस्वः॑ ॥ (६)
हे इंद्र! मैं तुम्हारे नए एवं पुराने कर्मों का वर्णन करता हूं. तुम ने राक्षसी मायाओं का सामना किया है, इस कारण सोमरस तुम्हारा ही हो गया है. (६)
O Indra! I describe your new and old deeds. You have faced demonic illusions, so Someras has become yours. (6)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 87
बृह॑स्पते यु॒वमिन्द्र॑श्च॒ वस्वो॑ दि॒व्यस्ये॑शाथे उ॒त पा॑र्थिवस्य । ध॒त्तं र॒यिं स्तु॑व॒ते की॒रये॑ चिद्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (७)
हे बृहस्पति! हे इंद्र! तुम दोनों ही दिव्य तथा पार्थिव धनों के स्वामी हो. तुम अपनी रक्षक शक्तियों के द्वारा हमारी रक्षा करते हुए हम स्तुति कर्ताओं को धन प्रदान करो. (७)
O Jupiter! O Indra! You are both masters of divine and earthly wealth. Protect us with your protecting forces and give money to us praisers. (7)