हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.87.3

कांड 20 → सूक्त 87 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 87
ज॑ज्ञा॒नः सोमं॒ सह॑से पपाथ॒ प्र ते॑ मा॒ता म॑हि॒मान॑मुवाच । एन्द्र॑ पप्राथो॒र्वन्तरि॑क्षं यु॒धा दे॒वेभ्यो॒ वरि॑वश्चकर्थ ॥ (३)
हे इंद्र! तुम प्रकट होते ही सोमरस की ओर जाते हो. तुम ने संग्राम में विजय प्राप्त कर के देवताओं को धन दिया. तुम विशाल अंतरिक्ष में गमन करते हो. यह अंतरिक्ष तुम्हारी कामना का बखान करता है. (३)
O Indra! You go towards Someras as soon as you appear. You conquered the battle and gave money to the gods. You travel in vast space. This space speaks of your wish. (3)