अथर्ववेद (कांड 20)
धु॒नेत॑यः सुप्रके॒तं मद॑न्तो॒ बृह॑स्पते अ॒भि ये न॑स्तत॒स्रे । पृष॑न्तं सृ॒प्रमद॑ब्धमू॒र्वं बृह॑स्पते॒ रक्ष॑तादस्य॒ योनि॑म् ॥ (२)
हे बृहस्पति! जो ऋत्विज् तुम्हें हमारी ओर आकर्षित करते हैं उन गमनशील, अहिंसक तथा घृत की बूंदें धारण करने वाले ऋत्विजों की तुम रक्षा करो. (२)
O Jupiter! Protect the movable, non-violent and ritvijas who attract you to us. (2)