हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
यस्त॒स्तम्भ॒ सह॑सा॒ वि ज्मो अन्ता॒न्बृह॒स्पति॑स्त्रिषध॒स्थो रवे॑ण । तं प्र॒त्नास॒ ऋष॑यो॒ दीध्या॑नाः पु॒रो विप्रा॑ दधिरे म॒न्द्रजि॑ह्वम् ॥ (१)
जिन बृहस्पति ने अपने घोष से पृथ्वी के छोर को भी स्तंभित किया, प्राचीन ऋषि उन का बारबार ध्यान करते हैं. वे बृहस्पति प्रसन्न करने वाली जिह्वा के स्वामी हैं. विद्वान्‌ ब्राह्मण बृहस्पति को प्रथम स्थान देते हैं. (१)
The ancient sages meditate on Jupiter, who also pillared the end of the earth with his ghosh. He is the swami of Jupiter's pleasing tongue. Learned Brahmins give Jupiter the first place. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
धु॒नेत॑यः सुप्रके॒तं मद॑न्तो॒ बृह॑स्पते अ॒भि ये न॑स्तत॒स्रे । पृष॑न्तं सृ॒प्रमद॑ब्धमू॒र्वं बृह॑स्पते॒ रक्ष॑तादस्य॒ योनि॑म् ॥ (२)
हे बृहस्पति! जो ऋत्विज्‌ तुम्हें हमारी ओर आकर्षित करते हैं उन गमनशील, अहिंसक तथा घृत की बूंदें धारण करने वाले ऋत्विजों की तुम रक्षा करो. (२)
O Jupiter! Protect the movable, non-violent and ritvijas who attract you to us. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
बृह॑स्पते॒ या प॑र॒मा प॑रा॒वदत॒ आ ते॑ ऋत॒स्पृशो॒ नि षे॑दुः । तुभ्यं॑ खा॒ता अ॑व॒ता अद्रि॑दुग्धा॒ मध्व॑ श्चोतन्त्य॒भितो॑ विर॒प्शम् ॥ (३)
हे बृहस्पति! मृत का स्पर्श करने वाले ऋत्विज्‌ तुम्हारी रक्षा साधनों वाली महान रक्षा के निमित्त बैठे हुए, पर्वतों से एकत्र किए हुए उत्तम मधु की तुम पर वर्षा करते हैं. (३)
O Jupiter! The Ritvijas, who touch the dead, shower on you the best honey collected from the mountains, sitting for the great protection of you with the means of protecting you. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
बृह॒स्पतिः॑ प्रथ॒मं जाय॑मानो म॒हो ज्योति॑षः पर॒मे व्योमन् । स॒प्तास्य॑स्तुविजा॒तो रवे॑ण॒ वि स॒प्तर॑श्मिरधम॒त्तमां॑सि ॥ (४)
बृहस्पति महान ज्योतिष चक्र से परम व्योम में आविर्भूत अर्थात्‌ प्रकट होते हैं. वे बृहस्पति सप्त रश्मि वाले बन कर अंधकार को मिटा देते हैं. (४)
Jupiter appears in the supreme vyom from the great astrology cycle. They erase darkness by becoming Jupiter sapta rashmi. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
स सु॒ष्टुभा॒ स ऋक्व॑ता ग॒णेन॑ व॒लं रु॑रोज फलि॒गं रवे॑ण । बृह॒स्पति॑रु॒स्रिया॑ हव्य॒सूदः॒ कनि॑क्रद॒द्वाव॑शती॒रुदा॑जत् ॥ (५)
त्रचा वाले गों के द्वारा वे बृहस्पति मेघों को चीरते हैं. वे हव्य से प्रेरित हो कर इच्छा करने वाली गायों को प्राप्त होते हैं और बारबार शब्द करते हैं. (५)
They rip the Jupiter clouds through the glass of the tree. They are inspired by eve and get the cows they desire and say words again and again. (5)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
ए॒वा पि॒त्रे वि॒श्वदे॑वाय॒ वृष्णे॑ य॒ज्ञैर्वि॑धेम॒ नम॑सा ह॒विर्भिः॑ । बृह॑स्पते सुप्र॒जा वी॒रव॑न्तो व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥ (६)
हे बृहस्पति! हम सुंदर और वीर संतानों से संपन्न धन के स्वामी बनें. हम उन बृहस्पति की हवियों और नमस्कारों के द्वारा पूजा करते हैं. (६)
O Jupiter! Let us be masters of wealth endowed with beautiful and heroic children. We worship those Jupiters with hugs and salutations. (6)