हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.88.6

कांड 20 → सूक्त 88 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
ए॒वा पि॒त्रे वि॒श्वदे॑वाय॒ वृष्णे॑ य॒ज्ञैर्वि॑धेम॒ नम॑सा ह॒विर्भिः॑ । बृह॑स्पते सुप्र॒जा वी॒रव॑न्तो व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥ (६)
हे बृहस्पति! हम सुंदर और वीर संतानों से संपन्न धन के स्वामी बनें. हम उन बृहस्पति की हवियों और नमस्कारों के द्वारा पूजा करते हैं. (६)
O Jupiter! Let us be masters of wealth endowed with beautiful and heroic children. We worship those Jupiters with hugs and salutations. (6)