हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.90.2

कांड 20 → सूक्त 90 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 90
जना॑य चि॒द्य ईव॑ते उ लो॒कं बृह॒स्पति॑र्दे॒वहू॑तौ च॒कार॑ । घ्नन्वृ॒त्राणि॒ वि पुरो॑ दर्दरीति॒ जयं॒ छत्रूं॑र॒मित्रा॑न्पृ॒त्सु साह॑न् ॥ (२)
देवहूति में संतान को उत्पन्न करने वाले एवं मनुष्यों को प्राप्त होने वाले बृहस्पति मेघों को खंडित करें. वे वृत्र के नगर का विनाश करते हैं. वे शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हुए सेनाओं का सामना करते हैं. (२)
In Devhuti, break the Jupiter clouds that produce children and get human beings. They destroy the city of Vritra. They face the armies while conquering the enemies. (2)