हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.90.3

कांड 20 → सूक्त 90 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 90
बृह॒स्पतिः॒ सम॑जय॒द्वसू॑नि म॒हो व्र॒जान्गोम॑तो दे॒व ए॒षः । अ॒पः सिषा॑स॒न्त्स्वरप्र॑तीतो॒ बृह॒स्पति॒र्हन्त्य॒मित्र॑म॒र्कैः ॥ (३)
बृहस्पति ने गायों से भरी हुई विशाल गोशालाओं तथा धनों पर विजय प्राप्त कर ली है. वे जल देने के लिए स्वर्ग पर चढते हैं तथा मंत्रों के द्वारा शत्रुओं को नष्ट कर देते हैं. (३)
Jupiter has conquered huge cowsheds and wealth full of cows. They ascend to heaven to give water and destroy enemies through mantras. (3)