हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.91.1

कांड 20 → सूक्त 91 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 91
इ॒मां धियं॑ स॒प्तशी॑र्ष्णीं पि॒ता न॑ ऋ॒तप्र॑जातां बृह॒तीम॑विन्दत् । तु॒रीयं॑ स्विज्जनयद्वि॒श्वज॑न्यो॒ऽयास्य॑ उ॒क्थमिन्द्रा॑य॒ शंस॑न् ॥ (१)
बृहस्पति ने सत्य के द्वारा उत्पन्न सात सिरों वाली बुद्धि को प्राप्त किया है. विश्व से उत्पन्न अयास्य ने इंद्र से कह कर तुरीय को उत्पन्न कराया. (१)
Jupiter has attained the seven-headed intellect generated by truth. Ayasya, born from the world, told Indra and created Turiya. (1)