हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.91.8

कांड 20 → सूक्त 91 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 91
ते स॒त्येन॒ मन॑सा॒ गोप॑तिं॒ गा इ॑या॒नास॑ इषणयन्त धी॒भिः । बृह॒स्पति॑र्मिथोअवद्यपेभि॒रुदु॒स्रिया॑ असृजत स्व॒युग्भिः॑ ॥ (८)
ये मेघ बैलों और गायों के समीप जाने की कामना करते हुए अपनी वृद्धियों के द्वारा उन्हें प्राप्त करते हैं. शब्द का पालन करते हुए बृहस्पति मेघों के द्वारा गायों से संयुक्त होते हैं. (८)
These clouds get them through their growths, wishing to get close to bulls and cows. Following the word Jupiter is combined with cows by clouds. (8)