हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.91.7

कांड 20 → सूक्त 91 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 91
स ईं॑ स॒त्येभिः॒ सखि॑भिः शु॒चद्भि॒र्गोधा॑यसं॒ वि ध॑न॒सैर॑दर्दः । ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्वृष॑भिर्व॒राहै॑र्घ॒र्मस्वे॑देभि॒र्द्रवि॑णं॒ व्यानट् ॥ (७)
इंद्र धन देने वाले तथा धरती को पुष्ट करने वाले मेघों को विदीर्ण करते हैं. ब्रह्मणस्पति आपस में टकराने वाले मेघों के द्वारा धन में व्याप्त होते हैं. (७)
Indra radiates the clouds that give wealth and strengthen the earth. Brahmanaspati permeates wealth through the clouds that collide with each other. (7)