हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.94.5

कांड 20 → सूक्त 94 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 94
गम॑न्न॒स्मे वसू॒न्या हि शंसि॑षं स्वा॒शिषं॒ भर॒मा या॑हि सो॒मिनः॑ । त्वमी॑शिषे॒ सास्मिन्ना स॑त्सि ब॒र्हिष्य॑नाधृ॒ष्या तव॒ पात्रा॑णि॒ धर्म॑णा ॥ (५)
हे इंद्र! इस स्तोता को तुम शुभ आशीर्वाद दो तथा इस यजमान में धन को प्रतिष्ठित करो. हे स्वामी इंद्र! इस सोम के गृह में आ कर कुश के इस आसन पर विराजमान हो जाओ तुम्हारे पात्र धारण शक्ति के कारण अपमान करने योग्य नहीं हैं. (५)
O Indra! Give auspicious blessings to this stota and establish wealth in this host. O Swami Indra! Come to this Soma's house and sit on this seat of Kush, your characters are not insultable due to their power. (5)