अथर्ववेद (कांड 20)
ए॒वैवापा॒गप॑रे सन्तु दू॒ढ्योश्वा॒ येषां॑ दु॒र्युज॑ आयुयु॒ज्रे । इ॒त्था ये प्रागुप॑रे सन्ति दा॒वने॑ पु॒रूणि॒ यत्र॑ व॒युना॑नि॒ भोज॑ना ॥ (७)
जिन अश्चों को दुर्युज नाम का सारथी रथ में जोड़ता है, वे कभी वृद्ध न हों. जो दाता को बहुत से भोज्य पदार्थों से युक्त बनाते हैं, वे मेघ हैं. (७)
Those who are joined by a charioteer named Duryuz should never grow old. The clouds are the ones that make the giver rich in many foods. (7)