अथर्ववेद (कांड 20)
आहा॑र्ष॒मवि॑दं त्वा॒ पुन॒रागाः॒ पुन॑र्णवः । सर्वा॑ङ्ग॒ सर्वं॑ ते॒ चक्षुः॒ सर्व॒मायु॑श्च तेऽविदम् ॥ (१०)
हे रोगी पुरुष! तू लौट आ तथा पुनः नव जीवन प्राप्त कर. इस कर्म के द्वारा मैं ने तुझे दर्शन शक्ति तथा पूर्ण आयु देने में सफलता प्राप्त कर ली है. (१०)
O patient man! Come back and have a new life again. Through this karma, I have succeeded in giving you vision power and full life. (10)