हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.96.13

कांड 20 → सूक्त 96 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 96
यस्ते॒ हन्ति॑ प॒तय॑न्तं निष॒त्स्नुं यः स॑रीसृ॒पम् । जा॒तं यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि ॥ (१३)
जो तेरे गिरते हुए अथवा निकलते हुए गर्भ को नष्ट करने की इच्छा करता है, हम उसे नष्ट करते हैं. (१३)
Whoever wishes to destroy your falling or outgoing womb, we destroy him. (13)