हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.96.24

कांड 20 → सूक्त 96 → मंत्र 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 96
अपे॑हि मनसस्प॒तेऽप॑ क्राम प॒रश्च॑र । प॒रो निरृ॑त्या॒ आ च॑क्ष्व बहु॒धा जीव॑तो॒ मनः॑ ॥ (२४)
हे रोग! तू मन पर भी अधिकार करने वाला है. तू दूर हो जा. इस जीवित पुरुष के मन से दूर होने के लिए तू निर्त्रति से कह. (२४)
O disease! You are also going to have authority over the mind. You get away. Tell nirrati to get away from the mind of this living man. (24)