अथर्ववेद (कांड 3)
इड॑या॒ जुह्व॑तो व॒यं दे॒वान्घृ॒तव॑ता यजे । गृ॒हानलु॑भ्यतो व॒यं सं॑ विशे॒मोप॒ गोम॑तः ॥ (११)
हम गाय के घी से युक्त हवि के द्वारा यज्ञ करते हुए देवों को प्रसन्न करते हैं. उन देवों की कृपा से हम सभी अभिलषित वस्तुओं एवं अनेक गायों से युक्त घरों को प्राप्त कर के उन में सुख से निवास करें. (११)
We please the gods by performing yagna through havi containing cow's ghee. By the grace of those gods, we should get all the desired things and houses with many cows and live happily in them. (11)