हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.10.8

कांड 3 → सूक्त 10 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
आयम॑गन्त्संवत्स॒रः पति॑रेकाष्टके॒ तव॑ । सा न॒ आयु॑ष्मतीं प्र॒जां रा॒यस्पोषे॑ण॒ सं सृ॑ज ॥ (८)
हे एकाष्टका! यह संवत्सर आ गया है. यह तेरा पति है. तू अपने पति संवत्सर के सहित हमारी संतान को अधिक आयु वाली करती हुई हमें धन संपन्न बना. (८)
O one-sided! This Samvatsar has arrived. This is your husband. You made us rich by making our children more old along with your husband Samvatsar. (8)