हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
प्रा॒तर॒ग्निं प्रा॒तरिन्द्रं॑ हवामहे प्रा॒तर्मि॒त्रावरु॑णा प्रा॒तर॒श्विना॑ । प्रा॒तर्भगं॑ पू॒षणं॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिं॑ प्रा॒तः सोम॑मु॒त रु॒द्रं ह॑वामहे ॥ (१)
हम शक्ति और बुद्धि प्राप्त करने के निमित्त प्रातःकाल अग्नि, इंद्र, मित्र, वरुण, भग, उषा, बृहस्पति, सोम और रुद्र का आह्वान करते हैं. (१)
We invoke Agni, Indra, Mitra, Varuna, Bhaga, Usha, Brihaspati, Soma and Rudra in the morning to get power and wisdom. (1)

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
प्रा॑त॒र्जितं॒ भग॑मु॒ग्रं ह॑वामहे व॒यं पु॒त्रमदि॑ते॒र्यो वि॑ध॒र्ता । आ॒ध्रश्चि॒द्यं मन्य॑मानस्तु॒रश्चि॒द्राजा॑ चि॒द्यं भगं॑ भ॒क्षीत्याह॑ ॥ (२)
जो आदित्य वर्षा आदि के द्वारा सब के धारण कर्ता और पोषण करने वाले हैं. दरिद्र भी जिन्हें अपने अभिमत फल का साधन जानता हुआ पूजा करता है तथा राजा भी जिन्हें पूजने का इच्छुक रहता है, हम प्रातःकाल उन अदिति पुत्र एवं अपराजित शक्ति वाले सूर्य का आह्वान करते हैं. (२)
Those who are the possessors and nurturers of all through Aditya Varsha etc. Even the poor, whom they worship knowing the means of their opinion and the king is also willing to worship, we invoke those Aditi sons and the sun with undefeated power in the morning. (2)

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
भग॒ प्रणे॑त॒र्भग॒ सत्य॑राधो॒ भगे॒मां धिय॒मुद॑वा॒ दद॑न्नः । भग॒ प्र णो॑ जनय॒ गोभि॒रश्वै॒र्भग॒ प्र नृभि॑र्नृ॒वन्तः॑ स्याम ॥ (३)
हे सूर्य! तुम सारे जगत्‌ के नेता हो. तुम्हारा धन कभी नष्ट नहीं होता. हमारी स्तुति को तुम सफल करो. हे भग! हमें गायों और घोड़ों से संपन्न करो. हम पुत्र, पौत्र, सेवक आदि मनुष्यों वाले बनें. (३)
O sun! You are the leader of the whole world. Your wealth is never lost. Make our praise successful. O Swami! Endow us with cows and horses. Let us be sons, grandsons, servants, etc. human beings. (3)

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
उ॒तेदानीं॒ भग॑वन्तः स्यामो॒त प्र॑पि॒त्व उ॒त मध्ये॒ अह्ना॑म् । उ॒तोदि॑तौ मघव॒न्त्सूर्य॑स्य व॒यं दे॒वानां॑ सुम॒तौ स्या॑म ॥ (४)
इस कर्म का अनुष्ठान करने के समय हम भग देव की कृपा दृष्टि पा कर धन और सौभाग्य वाले रहें. हे इंद्र! हम प्रात:काल, मध्या, संध्या के समय सूर्य, अग्नि आदि देवों की कृपा दृष्टि प्राप्त करते रहें. (४)
At the time of performing the ritual of this karma, we should be blessed with wealth and good fortune by getting the grace of God. O Indra! We should continue to get the grace of the gods like sun, agni etc. in the morning, midday, evening. (4)

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
भग॑ ए॒व भग॑वाँ अस्तु दे॒वस्तेना॑ व॒यं भग॑वन्तः स्याम । तं त्वा॑ भग॒ सर्व॒ इज्जो॑हवीमि॒ स नो॑ भग पुरए॒ता भ॑वे॒ह ॥ (५)
भग देव ही धनवान हैं. उन की कृपा से हम धन के स्वामी हैं. हे भग! इस प्रकार के तुम्हें सभी लोग बुलाते हैं. इस व्यापार में तुम हमारे आगे चलने वाले बनो. (५)
God is rich. By his grace, we are the masters of wealth. O Swami! This type of you are called by all people. In this business you become our forwardrunner. (5)

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
सम॑ध्व॒रायो॒षसो॑ नमन्त दधि॒क्रावे॑व॒ शुच॑ये प॒दाय॑ । अ॑र्वाची॒नं व॑सु॒विदं॒ भगं॑ मे॒ रथ॑मि॒वाश्वा॑ वा॒जिन॒ आ व॑हन्तु ॥ (६)
जिस प्रकार सवार के पीठ पर बैठ जाने के बाद घोड़ा चलने के लिए तैयार हो जाता है, उसी प्रकार उषा देवी धन देने वाले भग देव को मेरे यज्ञ में लाने के लिए प्रस्तुत हों. तेजी से दौड़ने वाले घोड़े जिस प्रकार रथ को ले जाते हैं, उसी प्रकार उषा देवी भग देव को मेरे पास ले आएं. (६)
Just as the horse is ready to walk after the rider sits on his back, usha devi should be presented to bring the money-giver Bhag dev to my yagna. Just as fast-moving horses carry the chariot, usha devi bring Bhag dev to me. (6)

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
अश्वा॑वती॒र्गोम॑तीर्न उ॒षासो॑ वी॒रव॑तीः॒ सद॑मुच्छन्तु भ॒द्राः । घृ॒तं दुहा॑ना वि॒श्वतः॒ प्रपी॑ता यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (७)
हे उषा देवी! बहुत से अश्चों, गायों, पुत्रपौत्र आदि से युक्त एवं कल्याण कारिणी बन कर सदा हमारे लिए उदित हों. हे उषा देवी! तुम जल प्रदान करती हुई तथा समस्त गुणों से युक्त हो कर अपने अविनाशी धनों से हमारी सदा रक्षा करो. (७)
O Usha Devi! Always rise for us by becoming a welfare worker and full of many horses, cows, sons, grandsons etc. O Usha Devi! May you always protect us from your imperishable riches by providing water and having all the qualities. (7)