हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.17.1

कांड 3 → सूक्त 17 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
सीरा॑ युञ्जन्ति क॒वयो॑ यु॒गा वि त॑न्वते॒ पृथ॑क् । धीरा॑ दे॒वेषु॑ सुम्न॒यौ ॥ (१)
बुद्धिमान लोग बैलों को हल में जोतते हैं. देवों को सुखकर अन्न प्राप्ति की इच्छा से वे बैलों के कंधों पर जुआ रखते हैं. (१)
Wise people plough bulls into ploughs. With the desire to get food by pleasing the gods, they gamble on the shoulders of bulls. (1)