हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.19.8

कांड 3 → सूक्त 19 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 19
अव॑सृष्टा॒ परा॑ पत॒ शर॑व्ये॒ ब्रह्म॑संशिते । जया॒मित्रा॒न्प्र प॑द्यस्व ज॒ह्ये॑षां॒ वरं॑वरं॒ मामीषां॑ मोचि॒ कश्च॒न ॥ (८)
हे बाण! तू मंत्रों के द्वारा तीक्ष्ण बनाया गया है तथा शत्रुओं के विनाश में कुशल है. तू हमारे धनुष से छूट कर शत्रु सेना की ओर जा कर गिर और उन के शरीर में प्रवेश कर के उन की उत्तम सेना का विनाश कर. शत्रु सैनिकों में से कोई भी बचने न पाए. (८)
Oh my god! You have been sharpened by mantras and are skilled in destroying enemies. You get rid of our bow and fall towards the enemy army and enter their bodies and destroy their superior army. None of the enemy soldiers could escape. (8)