अथर्ववेद (कांड 3)
कृ॒णोमि॑ ते प्राजाप॒त्यमा योनिं॒ गर्भ॑ एतु ते । वि॒न्दस्व॒ त्वं पु॒त्रं ना॑रि॒ यस्तुभ्यं॒ शमस॒च्छमु॒ तस्मै॒ त्वं भव॑ ॥ (५)
हे स्त्री! ब्रह्मा ने वृषभ संबंधी जो व्यवस्था की है, उस के अनुसार मैं तेरे लिए संतानोत्पत्ति संबंधी कर्म करता हूं. गर्भ तेरी योनि में जाए. उस के पश्चात तू पुत्र प्राप्त करे, वह पुत्र तेरे लिए सुख प्रदान करे तथा तू भी उस के लिए सुख का कारण बने. (५)
O woman! According to the arrangement made by Brahma regarding Taurus, I do child-bearing deeds for you. Let the womb go into your vagina. After that you get a son, may that son give you happiness, and you also be a source of happiness for him. (5)