हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.5.2

कांड 3 → सूक्त 5 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
मयि॑ क्ष॒त्रं प॑र्णमणे॒ मयि॑ धारयताद्र॒यिम् । अ॒हं रा॒ष्ट्रस्या॑भीव॒र्गे नि॒जो भू॑यासमुत्त॒मः ॥ (२)
हे पलाश से निर्मित पर्णमणि! मुझ मणि धारण कर्ता को बल एवं धन प्रदान करो. तुम्हें धारण करने के कारण मैं अपने राज्य को स्वाधीन करने में किसी की सहायता न लेने से सर्वोत्तम बनू. (२)
O leaf made of palash! Give strength and wealth to me, the one who holds the gem. Because of holding you, I will be the best than not taking anyone's help in liberating my kingdom. (2)