हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.5.6

कांड 3 → सूक्त 5 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
ये धीवा॑नो रथका॒राः क॒र्मारा॒ ये म॑नी॒षिणः॑ । उ॑प॒स्तीन्प॑र्ण॒ मह्यं॑ त्वं॒ सर्वा॑न्कृण्व॒भितो॒ जना॑न् ॥ (६)
हे पर्णमणि! तुम सभी मछली पकड़ने वाले, रथकार अर्थात्‌ बढ़ई, लुहार और बुद्धिजीवी जनों को मेरी सेवा करने के लिए मेरे चारों ओर उपस्थित करो. (६)
O swami! Present all of you fishing, charioteers, carpenters, blacksmiths and intellectuals around me to serve me. (6)