हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.12.1

कांड 4 → सूक्त 12 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 12
रोह॑ण्यसि॒ रोह॑ण्य॒स्थ्नश्छि॒न्नस्य॒ रोह॑णी । रो॒हये॒दम॑रुन्धति ॥ (१)
हे लाल रंग वाली लाख! तू घाव को भरने वाली है, इसलिए तू तलवार की धार से कटे हुए इस अंग से बहते रक्त को उसी स्थान पर रोक दे. हे अरुंधती देवी! तू इस रक्त निकले हुए अंग को रक्त युक्त एवं बिना घाव वाला बना. (१)
O red-colored lac! You are going to heal the wound, so stop the blood flowing from this organ cut off by the edge of the sword in the same place. O Arundhati Devi! You made this blood-drained organ blood-stained and unsound. (1)