अथर्ववेद (कांड 4)
प्र सु॑म॒तिं स॑वितर्वाय ऊ॒तये॒ मह॑स्वन्तं मत्स॒रं मा॑दयाथः । अ॒र्वाग्वा॒मस्य॑ प्र॒वतो॒ नि य॑च्छतं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (६)
हे सविता एवं वायु देव! हमारी रक्षा के लिए हमें उत्तम बुद्धि प्रदान करो तथा दीप्तिशाली एवं मादक सोमरस को पी कर प्रसन्न बनो. तुम दोनों उत्तम धन को हमारी ओर प्रेरित करो तथा हमें पाप से छुड़ाओ. (६)
O Savita and Vayu Dev! Give us good intelligence to protect us and be happy by drinking the radiant and intoxicating Somersa. Both of you inspire the best wealth towards us and redeem us from sin. (6)