अथर्ववेद (कांड 4)
म॒न्वे वां॑ मित्रावरुणावृतावृधौ॒ सचे॑तसौ॒ द्रुह्व॑णो॒ यौ नु॒देथे॑ । प्र स॒त्यावा॑न॒मव॑थो॒ भरे॑षु॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (१)
हे ऋत् अर्थात् सत्य, जल अथवा यज्ञ को बढ़ाने वाले एवं समान ज्ञान वाले मित्र और वरुण! मैं तुम दोनों के महत्त्व की स्तुति करता हूं. तुम द्रोह करने वालों का हनन कर देते हो. बुम सत्यप्रतिज्ञ पुरुष की संग्राम में रक्षा करते हो. ऐसे मित्र और वरुण मुझे पाप से बचाएं. (१)
O Rit means friends and Varuna who enhance truth, water or yajna and have the same knowledge! I appreciate the importance of both of you. You violate those who are hostile. You protect a man who is truthful in the struggle. May such friends and Varun save me from sin. (1)
अथर्ववेद (कांड 4)
सचे॑तसौ॒ द्रुह्व॑णो॒ यौ नु॒देथे॒ प्र स॒त्यावा॑न॒मव॑थो॒ भरे॑षु । यौ गच्छ॑थो नृ॒चक्ष॑सौ ब॒भ्रुणा॑ सु॒तं तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (२)
हे समान ज्ञान वाले मित्र और वरुण! तुम दोनों द्रोह करने वालों का पतन करते हो और सत्यप्रतिज्ञ जनों की युद्ध में रक्षा करते हो. तुम दोनों पीले रंग के रथ के द्वारा चल कर निचोड़े गए सोमरस को प्राप्त करते हो एवं मनुष्यों के कमो के साक्षी हो. तुम दोनों हमें पाप से बचाओ. (२)
O friends of equal knowledge and Varuna! Both of you fall the enemies and protect the truthful people in war. Both of you walk by the yellow chariot and get the squeezed someras and witness the deeds of human beings. You both save us from sin. (2)
अथर्ववेद (कांड 4)
यावङ्गि॑रस॒मव॑थो॒ याव॒गस्तिं॒ मित्रा॑वरुणा ज॒मद॑ग्नि॒मत्त्रि॑म् । यौ क॒श्यप॒मव॑थो॒ यौ वसि॑ष्ठं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (३)
हे मित्र और वरुण! तुम अगस्त्य, अंगिरस, जमदग्नि एवं अत्रि ऋषि की रक्षा करते हो. जिन मित्र और वरुण ने कश्यप और वसिष्ठ ऋषियों की रक्षा की, वे हमें पाप से छुड़ाएं. (३)
Hey friend and Varun! You protect Agastya, Angiras, Jamadagni and Atri Rishi. May the friends and Varuna who protected Kashyapa and Vasishtha rishis redeem us from sin. (3)
अथर्ववेद (कांड 4)
यौ श्या॒वाश्व॒मव॑थो वध्र्य॒श्वं मित्रा॑वरुणा पुरुमी॒ढमत्त्रि॑म् । यौ वि॑म॒दमव॑थः स॒प्तव॑ध्रिं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (४)
जिन मित्र और वरुण ने श्यावाश्व, वध्रयश्च पुरुषमीढ एवं अत्रि की रक्षा की, जिन मित्र और वरुण ने विमद और सप्तवध्रि ऋषि की रक्षा की, वे हमें पाप से बचाएं. (४)
May the friends and Varuna who protected Shyavashva, Vadhrayashcha Purushamidha and Atri, the friends and Varuna who protected Vimad and Saptavadhri Rishi, save us from sin. (4)
अथर्ववेद (कांड 4)
यौ भ॒रद्वा॑ज॒मव॑थो॒ यौ गवि॑ष्ठिरं वि॒श्वामि॑त्रं वरुण मित्र॒ कुत्स॑म् । यौ क॒क्षीव॑न्त॒मव॑थः॒ प्रोत कण्वं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (५)
हे मित्र और वरुण! तुम ने भरद्वाज, गविष्ठिर, विश्वामित्र एवं कुत्स ऋषि की रक्षा की. जिन मित्र और वरुण ने कक्षीवान तथा कण्व ऋषि की रक्षा की, वे हमें पाप से बचाएं. (५)
Hey friend and Varun! May you protect Bharadwaja, Gavithir, Vishwamitra and Kuts Rishi. (5)
अथर्ववेद (कांड 4)
यौ मेधा॑तिथि॒मव॑थो॒ यौ त्रि॒शोकं॒ मित्रा॑वरुणावु॒शनां॑ का॒व्यं यौ । यौ गोत॑म॒मव॑थः॒ प्रोत मुद्ग॑लं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (६)
जिन मित्र और वरुण ने मेधातिथि, त्रिशक तथा शुक्राचार्य के पुत्र उशना ऋषि की रक्षा की, जिन्होंने गोतम एवं मुद्गल ऋषि की रक्षा की, वे हमें पाप से छुड़ाएं. (६)
The friends and Varuna who protected Ushna Rishi, son of Medhatithi, Trishak and Shukracharya, who protected Gotam and Mudgal Rishi, should save us from sin. (6)
अथर्ववेद (कांड 4)
ययो॒ रथः॑ स॒त्यव॑र्त्म॒र्जुर॑श्मिर्मिथु॒या चर॑न्तमभि॒याति॑ दू॒षय॑न् । स्तौमि॑ मि॒त्रावरु॑णौ नाथि॒तो जो॑हवीमि तौ नो मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (७)
जिन मित्र और वरुण का सत्यमार्ग पर चलने वाला एवं रस्सियों से युक्त रथ निषिद्ध मार्ग पर चलते हुए पुरुष को बाधा पहुंचाता हुआ सामने आता है, मैं ऐसे मित्र और वरुण की स्तुति करता हूं एवं सुख की इच्छा से उन के निमित्त बारबार हवन करता हूं. वे दोनों मुझे पाप से बचाएं. (७)
The friend and Varuna's chariot running on the path of truth and with ropes comes out obstructing the man while walking on the forbidden path, I praise such friend and Varuna and do havan again and again for them with the desire for happiness. May they both save me from sin. (7)