अथर्ववेद (कांड 4)
आभू॑त्या सह॒जा व॑ज्र सायक॒ सहो॑ बिभर्षि सहभूत॒ उत्त॑रम् । क्रत्वा॑ नो मन्यो स॒ह मे॒द्ये॑धि महाध॒नस्य॑ पुरुहूत सं॒सृजि॑ ॥ (६)
हे वज्र के समान अकुंठित शक्ति वाले! हे शत्रुओं का अंत करने वाले एवं शत्रुओं के पराजय के साथ उत्पन्न मन्यु! तुम उत्तम बल धारण करते हो. तुम हमारे यज्ञ के साथ चिकने बनो. हे बहुत से यजमानों द्वारा बुलाए गए मन्यु! धन प्राप्ति वाले संग्राम में हमारे सहायक बनो. (६)
O one with unconsolidated power like a thunderbolt! O Manyu, the one who ends the enemies and arises with the defeat of the enemies! You hold the best force. You become smooth with our yajna. O many hosts called by! Be our helper in the struggle to get money. (6)