हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.31.7

कांड 4 → सूक्त 31 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
संसृ॑ष्टं॒ धन॑मु॒भयं॑ स॒माकृ॑तम॒स्मभ्यं॑ धत्तां॒ वरु॑णश्च म॒न्युः । भियो॒ दधा॑ना॒ हृद॑येषु॒ शत्र॑वः॒ परा॑जितासो॒ अप॒ नि ल॑यन्ताम् ॥ (७)
वरुण और मन्यु अपना धन ला कर हमें दें. हमारे शत्रु हृदय में भय धारण करते हुए पराजित हों तथा भयभीत हो कर भाग जाएं. (७)
Varun and Manu bring their money and give it to us. Our enemies should be defeated by holding fear in their hearts and run away in fear. (7)