हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 32
यस्ते॑ म॒न्योऽवि॑धद्वज्र सायक॒ सह॒ ओजः॑ पुष्यति॒ विश्व॑मानु॒षक् । सा॒ह्याम॒ दास॒मार्यं॒ त्वया॑ यु॒जा व॒यं सह॑स्कृतेन॒ सह॑सा॒ सह॑स्वता ॥ (१)
हे मन्यु! जो पुरुष तुम्हारी सेवा करता है, हे वज्र के समान अकुंठित शक्ति वाले एवं शत्रुओं का अंत करने वाले! वह पुरुष नित्य शत्रुओं को पराजित करने वाला अपना बल संपूर्ण रूप से बढ़ाता है. तुम बल उत्पन्न करने वाले, हराने वाले और शक्ति देने वाले हो. तुम्हारी सहायता से हम असुरों एवं उन के शत्रु देवों को भी पराजित करें. (१)
O Manu! The man who serves you, O one who has unconsolidated power like a thunderbolt and puts an end to enemies! That man always increases his force completely defeating enemies. You are the one who creates strength, defeats and gives strength. With your help, let us defeat the asuras and their enemy gods. (1)

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 32
म॒न्युरिन्द्रो॑ म॒न्युरे॒वास॑ दे॒वो म॒न्युर्होता॒ वरु॑णो जा॒तवे॑दाः । म॒न्युर्विश॑ ईडते॒ मानु॑षी॒र्याः पा॒हि नो॑ मन्यो॒ तप॑सा स॒जोषाः॑ ॥ (२)
मन्यु ही इंद्र हैं और मन्यु ही समस्त देव हैं. मन्यु देवों का आह्वान करने वाले, वरुण एवं जातवेद अग्नि हैं. जो मानुषी प्रजाएं हैं, वे भी मन्यु की ही स्तुति करती हैं. हे मन्यु! तुम तप से संयुक्त हो कर हमारी रक्षा करो. (२)
Manu is Indra and Manu is the whole God. Varuna and Jataveda are agni, who invoke the Manu devas. Those who are human beings also praise Manu. O Manu! You unite with penance and protect us. (2)

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 32
अ॒भीहि॑ मन्यो त॒वस॒स्तवी॑या॒न्तप॑सा यु॒जा वि ज॑हि॒ शत्रू॑न् । अ॑मित्र॒हा वृ॑त्र॒हा द॑स्यु॒हा च॒ विश्वा॒ वसू॒न्या भ॑रा॒ त्वं नः॑ ॥ (३)
हे मन्यु! हमारे सामने आओ एवं महान से भी महान बन कर अपने संताप की सहायता से हमारे शत्रुओं का विनाश करो. स्नेह न करने वाले के हंता, शत्रु वधकारक एवं दस्यु विनाशकारी तुम हमारे लिए सभी धनों को लाओ. (३)
O Manu! Come before us and become greater than great and destroy our enemies with the help of your anger. You bring us all the wealth that is destructive, enemy destroyer and bandit destroyer of the one who does not love. (3)

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 32
त्वं हि म॑न्यो अ॒भिभू॑त्योजाः स्वयं॒भूर्भामो॑ अभिमातिषा॒हः । वि॒श्वच॑र्षणिः॒ सहु॑रिः॒ सही॑यान॒स्मास्वोजः॒ पृत॑नासु धेहि ॥ (४)
हे मन्यु! तुम्हारा बल पराजित करने वाला है. तुम स्वयंभू, क्रोधी, शत्रुओं को सहन करने वाले, विश्व के द्रष्टा, सहनशील एवं सहने वालों में शरेष्ठ हो. तुम संग्राम में हमें बल प्रदान करो. (४)
O Manu! Your force is going to defeat. You are self-styled, angry, tolerant of enemies, seer of the world, tolerant and tolerant. You give us strength in battle. (4)

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 32
अ॑भा॒गः सन्नप॒ परे॑तो अस्मि॒ तव॒ क्रत्वा॑ तवि॒षस्य॑ प्रचेतः । तं त्वा॑ मन्यो अक्र॒तुर्जि॑हीडा॒हं स्वा त॒नूर्ब॑ल॒दावा॑ न॒ एहि॑ ॥ (५)
हे उत्तम ज्ञान वाले मन्यु! तुम्हारे महान यज्ञ में भाग न लेने वाला अर्थात्‌ तुम्हारा यजमान न बनने वाला मैं युद्ध से भाग आया हूं. तुम्हारे संतोष के कर्म न करने वाले मैंने तुम्हें क्रोधित बना दिया. इस समय तुम मेरे बलदाता बन कर आओ. (५)
O manyu of good knowledge! I have fled the war, the one who did not participate in your great sacrifice, that is, who did not become your host. I made you angry for not doing your satisfying deeds. At this time you come as my strongman. (5)

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 32
अ॒यं ते॑ अ॒स्म्युप॑ न॒ एह्य॒र्वाङ्प्र॑तीची॒नः स॑हुरे विश्वदावन् । मन्यो॑ वज्रिन्न॒भि न॒ आ व॑वृत्स्व॒ हना॑व॒ दस्यूं॑रु॒त बो॑ध्या॒पेः ॥ (६)
हे मन्यु! मैं तुम्हारा यज्ञ कर्म करने वाला हो गया हूं. तुम मेरे समीप आओ और मेरे सामने हो कर शत्रुओं की ओर चलो. हे सहनशील एवं सभी फल देने वाले! हे वर्जनशील आयुधधारी मित्र! हमारे सामने रहो. हम दोनों अपने शत्रुओं का विनाश करेंगे. तुम हमें अपना बंधु जानो. (६)
O Manu! I have become your yajna karma karyakarta. Come near to me and walk before me and walk towards the enemies. O tolerable and all-fruitful! O wise friend! Be in front of us. We will both destroy our enemies. You let us know your brothers. (6)

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 32
अ॒भि प्रेहि॑ दक्षिण॒तो भ॑वा॒ नोऽधा॑ वृ॒त्राणि॑ जङ्घनाव॒ भूरि॑ । जु॒होमि॑ ते ध॒रुणं॒ मध्वो॒ अग्र॑मु॒भावु॑पां॒शु प्र॑थ॒मा पि॑बाव ॥ (७)
हे मन्यु! हमारे सामने आओ और हमारी दाहिनी ओर रह कर हमारे सचिव का काम करो. इस के पश्चात हम बहुत से शत्रुओं का विनाश करेंगे. हम तुम्हारे लिए धारण करने वाले मधुर सोमरस का सार अंश देते हैं. हम दोनों सब से पहले इस प्रकार सोमरस पिएं कि किसी को पता नहीं चले. (७)
O Manu! Come before us and stay on our right side and work as our secretary. After this, we will destroy many enemies. We give you the essence of the sweet someras we hold for you. Both of us should first drink somers in such a way that no one knows. (7)